

नमस्कार! मैं पवन अग्रवाल… सोचता बहुत हूँ, और जो सोचता हूँ, वो लिख देता हूँ।
यहाँ मिलेंगी मेरी कहानियाँ, कविताएँ, गीत, लेख और व्यंग्य, ज़िंदगी के छोटे-बड़े किस्सों से निकली हुई।
मेरी रचनाएँ
- मेरा पेड़
एक किसान ने अपनी छोटी सी ज़मीन के टुकड़े में एक पौधा लगाया। बीज बोने से लेकर उसे बड़ा करने तक वह उसमें लगा रहा।… Read more: मेरा पेड़ - तालिबान, अफ़गानिस्तान और हम!
(यह लेख सितंबर 2021 में अफ़गानिस्तान में तालिबान की वापसी के समय लिखा गया था।) अफगानिस्तान से अमेरिका की रवानगी होते ही ये देश फिर… Read more: तालिबान, अफ़गानिस्तान और हम! - कोरोना की लुका-छुपी और ज़िन्दगी
(यह लेख अगस्त 2021 में कोरोना काल के दौरान लिखा गया था।) ये तो कोई नई बात नहीं है कि जब से कोरोना आया है,… Read more: कोरोना की लुका-छुपी और ज़िन्दगी - कोरोना श्रंखला 1
(यह लेख जुलाई 2021 में कोरोना काल में लिखा गया था।) अपनी लंबी चुप्पी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. दरअसल दूसरी लहर के झंझावात में मैं… Read more: कोरोना श्रंखला 1 - लाठी
गर्मी की दोपहर में गली सन्नाटे की चार ओढ़े सुस्ता रही थी. बिमला भी सब काम-धाम निपटाकर अपनी झोंपड़ी की चारपाई पर पड़ी उनींदी सी… Read more: लाठी - बड़ा धारदार है ‘उधार’!
उधार… ऋण… लोन… ये शब्द बड़े सरल, सुहाने और भोले लगते हैं और आम आदमी को आकर्षित भी करते हैं, क्योंकि इन शब्दों को सुनकर… Read more: बड़ा धारदार है ‘उधार’! - भारत की देहाती मिट्टी अंतरराष्ट्रीय आसमान में!
(यह लेख फ़रवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान लिखा गया था।) किसान आंदोलन… ये दो शब्द आज हर जगह छाए हुए हैं, न्यूज़ चैनलों… Read more: भारत की देहाती मिट्टी अंतरराष्ट्रीय आसमान में! - कहानियाँ
कहानियों के साथ हमारा नाता बहुत गहरा होता है. एक माँ अक्सर अपने गर्भस्थ शिशु को कहानियाँ सुनाती है, इसलिए हम और किसी के बारे… Read more: कहानियाँ - आँखों में अब ख्वाब नहीं सन्नाटा है
आँखों में अब ख्वाब नहीं सन्नाटा हैजाने किसने हम दोनों को बाँटा है… बस इतनी सी बात, कि मिलकर रहना हैबस इतना सा ख्वाब, कि… Read more: आँखों में अब ख्वाब नहीं सन्नाटा है
