तालिबान, अफ़गानिस्तान और हम!
अफगानिस्तान से अमेरिका की रवानगी होते ही ये देश फिर उसी जगह आ गया है, जहाँ वो लगभग बीस साल […]
अफगानिस्तान से अमेरिका की रवानगी होते ही ये देश फिर उसी जगह आ गया है, जहाँ वो लगभग बीस साल […]
ये तो कोई नई बात नहीं है कि जब से कोरोना आया है, ये दुनिया काफ़ी कुछ बदल गई है. […]
अपनी लंबी चुप्पी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. दरअसल दूसरी लहर के झंझावात में मैं भी इस तरह बेतरतीब हुआ कि […]
महिलाओं से परिचय के दौरान अक्सर एक सवाल पूछा जाता है – आप क्या करती हैं? जवाब में प्राय: दो […]
फ्री… मुफ़्त… नि:शुल्क… ये आकर्षक और लुभावने शब्द हमें अक्सर देखने, सुनने और पढ़ने में आते हैं. जैसे-जैसे बाज़ारीकरण और […]
दो सेकंड… बस दो सेकंड… ये वक्त ही कितना होता है! पर दो सेकंड का ये छोटा सा टुकड़ा बहुत […]
हममें से बहुत से लोगों की एक शिकायत होती है, और वो ये कि हम इतने समय से पूजा-पाठ कर […]
लोहा… प्लास्टिक… रद्दी पेपर वाला… कबाड़ वाला, भंगार वाला… अक्सर गली में ठेला गाड़ी की खड़-खड़ के साथ सप्तम् स्वर […]
एक मैकेनिक कौन होता है? जो बिगड़ी चीज़ों को सुधार दे. तो हमें भी कोशिश करनी चाहिए कि हम भी […]
सतत, लगातार, निरंतर, बिना रुके. ये शब्द यूं तो बड़े साधारण लगते हैं, पर यकीन मानिए, इनमें जादू है, ज़बर्दस्त […]