शुकर कर, फिकर न कर…
मौसम ज़रूर खिज़ा का है, पर इसमें तू और भी निखर चलता चल, के तू अकेला नहीं तेरे साथ कारवाँ […]
मौसम ज़रूर खिज़ा का है, पर इसमें तू और भी निखर चलता चल, के तू अकेला नहीं तेरे साथ कारवाँ […]
कोई भी बात हो, थोड़ा सा मुस्कुरा दो!हाँ, सबकुछ अच्छा हैऔर जो नहीं है, वो भी अच्छा हो जाएगाहर बिगड़ी […]
कोई थाम ले उंगली, बस इतनी सी चाहत हैकोई राह दिखा दे, बस इतनी सी चाहत हैअंधेरे कशमकश के बहुत […]
बुझे हुए दीये से रोशनी तो नहीं मिलती पर मिलते हैं रोशनी के निशान जो रह गए हैं उसके होठों […]
मेरा भी तो संडे है केवल तुम ही क्यों हो भाई, मैं भी तो इंसान हूँ. मेरे भी अरमान हैं, […]