ये जो छोटे भाई होते हैं
ये ही हमें बड़ा बनाते हैं
ये मुट्ठी से रेत की तरह फिसलते हैं
कभी पीछे, तो कभी बहुत आगे-आगे चलते हैं
ये छोटे होने का बड़ा फ़ायदा उठाते हैं
पर ये ही तो हमें बड़ा बनाते हैं.
ये हमारी उंगली नहीं थामते
और बेफ़िकर दौड़ते फिरते हैं
ये सोचकर कि हम हैं,
उन्हें गिरने से बचाने के लिए,
हमें हर कदम अपना फ़र्ज़ याद दिलाते हैं,
ये ही तो हमें बड़ा बनाते हैं.
जब कोई आ खड़ा होता है सामने हमारे
हम तो नहीं, पर ये उससे भिड़ जाते हैं
वैसे तो ये कभी सुनते नहीं हमारी
पर ऐसे में ये ही हमारे लिए लड़ जाते हैं
हमारे ये छोटे ही हमारी हिम्मत बढ़ाते हैं
ये ही तो हमें बड़ा बनाते हैं.
हम यूँ तो किसी से हारते नहीं
पर कभी-कभी ये ही हमें हरा जाते हैं
मुड़कर देखते नहीं, आगे निकल जाते हैं
इन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश में
हम खुद पिछड़ जाते हैं
जब हम थकने लगते हैं
और मदद के लिए इन्हें बुलाते हैं
तब ये आते नहीं
और हम अकेले रह जाते हैं
हम बड़े होते हैं, पर ये हमसे भी बड़े बन जाते हैं
ये ही हमें एहसास दिलाते हैं
कि वक्त अब हमारा नहीं रहा
हम बस गुज़रे दिनों को याद करते जाते हैं
और इनकी हर गलती को माफ़ करते जाते हैं
इतना बड़प्पन हम कहाँ से लाते हैं
शायद ये ही हमें सिखाते हैं
ये ही हमें बड़ा बनाते हैं.

