लेख
तालिबान, अफ़गानिस्तान और हम!
अफगानिस्तान से अमेरिका की रवानगी होते ही ये देश फिर उसी जगह आ गया है, जहाँ वो लगभग बीस साल […]
लेख
कोरोना की लुका-छुपी और ज़िन्दगी
ये तो कोई नई बात नहीं है कि जब से कोरोना आया है, ये दुनिया काफ़ी कुछ बदल गई है. […]
लेख
कोरोना श्रंखला 1
अपनी लंबी चुप्पी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. दरअसल दूसरी लहर के झंझावात में मैं भी इस तरह बेतरतीब हुआ कि […]
व्यंग्य
बड़ा धारदार है ‘उधार’!
उधार… ऋण… लोन… ये शब्द बड़े सरल, सुहाने और भोले लगते हैं और आम आदमी को आकर्षित भी करते हैं, […]
आजकल
भारत की देहाती मिट्टी अंतरराष्ट्रीय आसमान में!
किसान आंदोलन… ये दो शब्द आज हर जगह छाए हुए हैं, न्यूज़ चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक, क्लबों या […]
गीत
आँखों में अब ख्वाब नहीं सन्नाटा है
आँखों में अब ख्वाब नहीं सन्नाटा हैजाने किसने हम दोनों को बाँटा है… बस इतनी सी बात, कि मिलकर रहना […]
गीत
ये रात न बीते कभी
ये रात न बीते कभी…ये रात न बीते कभी… दिन के उजालों मेंचैन कहाँ मिलता हैज़िन्दगी रुकती नहींवक्त बस चलता […]










